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Diler Hasina (1960)

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  • Release Date1960
  • LanguageHindi
  • Shooting LocationCentral Studio (Roongta Cine Corporation), Tardeo, Bombay
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जुल्म की जब इन्तहा हो जाये तो बग़ावत के आसार पैदा हो जाते हैं। इसी बग़ावत को ख़त्म करने के लिये होकमुल वक्त सम्बारा ने मुल्क के पहले बाग़ी को गोली का निशाना बना दिया। लेकिन बगावत फिर भी वक्त की गोद में पलती रही। एक अरसे के बाद काला सवार नामी एक श्ख्स अवाम की मदद के लिये आगे बढ़ा। काला सवार के बारे में कोई नहीं जानता था कि वह कौन है और कहाँ रहता है लेकिन जब भी जरूरत होती वह आ मौजूद होता। तंग आकर संबारा ने काले सवार की गिरफ्तारी के लिये एक नये सिपाहसलार के चुनाव के ख़ातिर जश्न मुनाक़द किया। भरे मजमे में पुराने सिपाहसलार ने मुकाबले के मुल्क के तमाम नौजवानों के ललकारा। लेकिन किसी में आगे बढ़ने की जुररत न हुई। आखीरकार हसीना नाम की एक लड़की आगे बढ़ी जिसे यह कह कर बिठा दिया गया कि इस मुकाबले में औरतों को हिस्सा लेने की इज़ाजत नहीं है। सिपाहसलार की आखरी ललकार पर एक नौजवान मुकाबले के लिये मैदान में आया। यह था दिलेर- जिसके बूढ़े बाप को सम्बारा ने बगावत के जुर्म में गोली का निशाना बना दिया था। दोनो में डटकर मुकाबला हुआ-दिलेर ने सिपाह सलार के छक्के छुड़ा दिये और दस्तूर के मुताबिक सिपाहसलारे आज़म का ओहदा दिलेर को सौंप दिया गया। सबसे पहली खिदमत जो उसके सुपुर्द की गयी वह थी काले सवार की गिरफ़्तारी।

अवाम में खलबली मच गयी क्योंकि दिलेर जो कल तक उनका साथी था- सिपाहसलार बनते ही काले सवार को गिरफ़्तार करने में तुल गया। इसी मुठमेड़ में दिलेर की मुलाक़ात एक मर्तबा फिर हसीना से हुई।

हसीना चाकू निकाल कर अपने दुश्मान को ख़त्म कर देने के लिये आगे बढ़ी। दिलेर चाकू का यह वार तो बचा गया लेकिन अपना दिल न बचा सका। रफता रफता यह दुश्मनी एक रंगीन दुश्मनी में और फिर मुहब्बत में तबदील हो गयी। बदकिस्मती के वसूल की ख़ातिर वह दोनों फिर भी एक दूसरे से जुदा रहे नदी के उन किनारों की तरह जो साथ होते हुए भी हमेशा एक दूसरे से दूर रहते हैं। इधर दिलेर के दोस्त फिसकू ने एक मालन से राहो-रस्म कर ली। मज़ा देखिये कि इस मुहब्बत में उसका राज़दार मालन का अपना भाई ही था। जो बातें फिसकू मालन से करता वह आकर उसी के भाई को सुनाता रहता। आखीरकार एक दिन बिचारा पकड़ा गया। वक्त ने फिर करवट बदली-सम्बारा का पुराना सिपाहसलार काला सवार को गिरफ़्तार करने में कामयाब हो गया। संबारा ने भरे चैक में उसके मुंह से नक़ाब उठाने का ऐलान करा दिया। भारी तादाद में अव्वाम अपने महबूब को देखने के लिए जमा हुए। काला सवार कौन था- सम्बारा का क्या हश्र हुआ - फिसकू और मालन पर क्या बीती-दिलेर और हसीना की मुहब्बत का क्या अंजाम हुआ? यह सब पर्देए सीमी पर देखिये.....

(From the official press booklet)

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