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Sila (1987)

  • LanguageHindi
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सिला प्रियादास की कहानी है। सिला एक पढ़ी लिखी आज़ाद ख्याल और अमीर बाप की इकलौती औलाद थी। मि. दास को अपनी बेटी के लिए जब शहर के सबसे रईस आदमि मि. देवानन्द का रिश्ता आया तो वो इन्कार न कर सके, मगर अपनी बेटी के स्वभाव को जानते हुऐ उन्होंने तीन दिन की मोहलत मांगकर बात को पक्का किये बिना टूटने नहीं दिया। लेकिन जब प्रिया से उन्होंने बात की तब उनको पता चला कि उनकी बेटी तो अजीत नाम के एक मामूली इन्सान से प्यार करती है। लाजिक और रीज़न के बाहर प्रिया की ये पसन्द मि. दास को बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगी, और उन्होंने इस बात को छुपाया भी नहीं और अपनी बेटी से साफ-साफ कह दिया। मगर प्रिया जो दिल और दिमाग से अजीत की हो चुकी थीं, उसने अपने पिता के हर सवाल का एक ही जवाब दिया कि मैं अजीत से प्यार करती हूं। मजबूर होकर मि. दास ने अपना आखिरी हथियार इस्तेमाल किया और कहा कि अगर तुम अजीत से शादी करोगी तो मेरी तरफ से तुम्हें सिवाय मेरे नाम के कुछ भी नहीं मिलेगा। दौलत मोहब्बत के सामने फीकी पड़ गयी और प्रिया ने अजीत से शादी कर ली।

तकदीर इन्सान की जिन्दगी के साथ अजीब-अजीब खेल खेलती है। यहां तकदीर ने प्रिया के साथ भी खेल खेला। जिस इन्सान को ठुकराकर उसने अजीत से शादी की थी, अजीत उसी इन्सान के एक मोटर ड्राइविंग सिखाने वाले स्कूल में मैनेजर था। मि. देवानन्द जिसको ठुकराया प्रिया अजीत की जिन्दगी में आयी थी वो शहर का सबसे रईस आदमी था और वो आसानी से हार नहीं मानता था वो प्रिया को किसी भी कीमत पर हासिल करना चाहता था। उसने प्रिया और अजीत पर दौलत और मेहरबानियों की ऐसी बारिश शुरू की कि वो दोनों दबते चले गये, खासतौर से अजीत। और फिर एक दिन ऐसा आया जब अजीत से नशे के हालत में गाड़ी चलाते हुये एक एक्सीडेंट हो गया और उसमें चार इन्सानों की मौत हो गयी। शराब के नशे में चार इन्सानों को मार देने वाले इन्सान को कानून भी मौत से कम सज़ा तो देगा नहीं। ये रीयलाइज़ करके अजीत बहुत डर गया।

कहते है कि जो काम इस दुनिया का खुदा भी नहीं कर सकता, वो पैसा कर सकता है क्योंकि पैसा ही आज की दुनिया का खुदा है। ये भी तकदीर की ही एक चाल ती कि पैसे वाला देवानन्द आज प्रिया और अजीत के लिऐ खुदा बन गया था वो अजीत को फांसी के फन्दे से बचा सकता था, मगर शर्त थी कि प्रिया की एक रात। प्रिया क्या करे, पति की जान पर अपनी इज्जत कुर्बान कर दे या अपनी इज्जत बचाने के लिए पति की जान कुर्बान कर दे। यह फैसला एक औरत नहीं एक पत्नी को करना था। उस पत्नी ने क्या फैसला किया यह आप फिल्म ’सिला’ देखकर समझ पायेंगे।

(From the official press booklet)