indian cinema heritage foundation

Nek Khatoon (1959)

  • GenreDrama
  • FormatB-W
  • LanguageHindi
  • Length87.17 meters
  • Gauge35 mm
  • Censor RatingU
  • Censor Certificate NumberU-27562-MUM
  • Certificate Date27/5/1959
  • Shooting LocationJyoti Studios
Share
193 views

नूरे हक़ शमा इलाही को बुझा सकता है कौन।
जिसका हामी हो ख़ुदा उसको मिटा सकता है कौन।

पहले अंधेरा था-फिर ख़ुदा ने हुकुम दिया रोशनी हो जा, और रोशनी हो गई।

फ़िरौन के महल में गुनाहों का अंधेरा था। अल्ला ने उसके घर में रोशनी की किरन भेजी। रोशनी की किरन ने अमिना के रूप में फ़िरौन के घर में जन्म लिया।

नेकी और बदी के दरम्यान जंग शुरू हो गई। मासूम शहजादी अमिना फ़िरौन की ख़ुदाई से इन्कार करती रही। फिरौन उस पर ज़ुल्म ढाता रहा। एक दिन फिरौन ने गुस्से में आकर शहज़ादी अमिना को आग में फेंकवा दिया। मगर अल्ला ने फ़कीर शामा को मौके पर भेजकर अमिना को बचा लिया। फ़िरौन ने जादूगरों को रवाना किया। मगर उसका जादू अल्ला परस्त अमिना पर कारगर न हुआ। तंग आकर फिरौन अपने हाथ से नन्ही अमिना को कत्ल करने का इरादा किया। लेकिन अल्ला की याद करने वाली अमिना पर तलवार ने भी कोई असर न किया।

उन्हें इन्हीं ज़ुल्मों को सहते सहते अमिना जवान हो गई। लेकिन वह हक के रास्ते से न हटी। फ़िरौन ने उसकी शादी हामान कोड़ी से कर दी और उन्हें घर से निकाल दिया। नेक अमिना अल्ला पर भरोसा करके अपने लाचार शौहर को साथ लेकर जगह जगह फिरती रही। उसने फैसला कर लिया कि दरबारे हबीब में ले जाकर वो अपने लाचार शौहर को अच्छा कर लेगी। हामान कोड़ी नहीं चाहता था कि शहज़ादी उसकी वजह से अपनी ज़िन्दगी बरबाद कर दे। लेकिन वह मज़बूर था। अमिना के ख़िदमत के सामने उसकी कुछ न चली।

नेकी और बदी की जंग जारी रही।

अमिना ने अपने  प्यासे शौहर को बचाने के लिये अपनी पांव की कुर्बानी दे दी। अल्ला की रहमत से उसकी टांग अच्छी हो गई। फिरौन के आदमियों ने अमिना के दोनों हाथ काट लिये। तमाम अल्ला परस्तों को क़त्ल करने का इरादा किया। तमाम अल्ला परस्त बस्ती छोड़कर चले गये। लश्कर ने उनका पीछा किया। सामने दर्या था और पीछे फिरौन की लश्कर। अमिना ने ख़ुदा से दुआ की और दर्यां में रास्ता हो गया।

तमाम अल्ला परस्त दर्यां पार कर गये। जब लश्कर दर्यां पार कर रही थी कि दर्या मिल गया, और लश्कर ग़र्क हो गया। अमिना फिर हमान कोड़ी को मक्का मौज़मा की तरफ ले चली। जब मक्का मौज़मा पहुंचने की ताकत न रही तो अमिना ने रो रो कर अपने अल्ला से दुआ मांगी, और अल्ला ने उसी जगह मक्का मज़मा का जलवा दिखा दिया, और अमिना के दोनों हाथ ठीक हो गया। फिर अमिना ने अपने पाक हाथों से अपने शौहर को आब ज़मज़म पिलाया और उस पर छिड़का, तो वह अपनी असली सूरत पर आ गया और फौरन अल्ला पर ईमान ले आया।

(From the official press booklet)

Cast

Crew