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Dilwaala (1986)

  • LanguageHindi
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"दिलवाला" कहानी है कुछ चरित्रों की जो इसी दुनिया से संबन्धित है, किन्तु उनके दृष्टिकोण अलग-अलग हैं। एक ओर रवि दिलवाला जिसका दिल गंगा जल की तरह पवित्र, हिमालय की तरह ऊँचा और भारत देश की तरह विशाल है। जो इस कलयुग में सतयुग के सपने देखता है और हर अन्याय का डटकर मुकाबला करता है। रवि की बड़ी बहन सुमित्रा देवी बड़ी वफ़ादार और इन्साफ़ पसंद जज हैं। सुमित्रा देवी की छोटी बहन का नाम शान्ती है। मगर वो आग बबूले की तरह अशान्ती है। दिल की अच्छी, जुबान की कड़वी उसकी शादी एक फ़र्ज निभाने वाले पुलीस आफ़ीसर सोहन से हुई है।

राजशेखर एक फाँदेबाज किसम का सियासतदान जिसकी ज़िन्दगी का मकसद है राजनीति का गलत इस्तेमाल करके रूपये कमाना। उसका बेईमान आसिस्टेंट हैं सेवकराम सीतापुरी। उसकी लड़की पद्मा रवि के इश्क में गिरफ्तार हो जाती है। ये बात सेवकराम को एक आँख नहीं भाती।

राजशेखर फिर अपनी चाल का मोहरा चलता हैं। वो अपने बेटे रघु की शादी एक झोंपड़ पट्टी के माने हुये इनसान गणेश की सुपुत्री कमला से कर देता है और गणेश को कहता है कि वो सारी झोंपड़ पट्टी को खाली करवा दे। क्योंकि वो वहाँ फाइव स्टार होटल बनवाना चाहता है। गणेश इनसानियत का पुजारी है और वो इनकार कर देता है। राजशेखर और रघु कमला का कतल कर देते हैं और पुलीस को कहते है कि उसने आत्महत्या की। पुलीस रघु को गिरफ्तार कर लेती है और मुकद्दमा सुमित्रा देवी की अदालत में आता है।

कहानी के इस मोड पर सुमित्रा देवी को छोडा हुआ पति मदन जज सुमित्रा देवी से राजशेखर की सिफ़ारिश करता है और जज की बेटी सपना को माँ से न मिलाने की धमकी देता है।

राजशेखर एक निहायत ही खतरनाक किसम के गुंडे की मदद से सुमित्रा देवी के घर में चंपा नाम की लड़की को नौकरानी रखवा देता है। चंपा की शादी सुमित्रा देवी के दूसरे भाई मोहन से हो जाती है। उनकी सुहाग रात को ही चंपा का कतल हो जाता है। मोहन को गिरफ्तार कर लिया जाता है...

दोनों कतल के मुकद्दमे.... रघु ने अपनी पत्नी कमला का कतल किया.... मोहन ने अपनी पत्नी चंपा का कतल किया.... जज सुमित्रा देवी की दालत में चल रहे हैं। फ़ैसला क्या होता है.... दिलवाला रवि इस में क्या हिस्सा लेता है ये जानने के लिये आपको "दिलवाला" जरूर देखना होगा।

(From the official press booklet)

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