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Amar Akbar Anthony (1977)

  • LanguageHindi
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किशनलाल एक ड्राइवर था, उसके तीन बेटे और पत्नी का हराभरा छोटासा सुखी संसार था। अपने मालिक राबर्ट के प्रति वह बेहद इमानदार व वफादार था।

एकबार मालिक राबर्ट से एक्सीडेंट हो जाता है, और वह किशनलाल को इल्जाम सरपे लेने के लिए मजबूर करता है, और किशनलाल के घर में हर महिने खर्च देनेका वादा करता है। वफादार किशनलाल जेल चला जाता है।

जेलसे जब वह वापस आता है तो वह अपना घर उजड़ा हुवा पाता हैं, पत्नीको टी.बी. हो जाता है। वह अपने मालिक के यहाँ मदद के लिए जाता है। राबर्ट उसे मदद करना तो दूर रहा पर पहचानने से भी इन्कार कर देता है। दुःख और क्षोभ से किशनलाल राबर्ट के उपर पिस्तोल फायर करता है। और राबर्ट की कार से निकल जाता है।

इधर किशनलाल की पत्नी बच्चे के हाथमें पत्र छोड़कर आत्महत्या करने निकलती है। पर दुर्घटना वश उसकी दृष्टी चली जाती है। उधर किशनलाल बच्चों को लेकर निकल पड़ता है बच्चों को एक पार्क में छोड़कर वह आगे निकलता है। वह कार दुर्घटना ग्रस्ट हो जाती है। इधर बड़ा लड़का एक जीप से टकरा जाता है, उसे पुलिस उठाकर ले जाती है। दुसरा, एक चर्च में पादरी के पास पहुँचता है वही उसकी परवरीश होती है। सबसे छोटा एक मुस्लीम के हाथ लग जाता है।

इस तरह किशनलाल का सारा परिवार बिछड़ जाता है। समय बीता।

अब किशनलाल बहुत बड़ा सेठ बन गया। इधर सबसे बड़ा लड़का अमर पुलिस अफसर बन गया। बहुत ही कर्मठ।

मफला जो पादरी के यहाँ पालने लगा एन्थनी गोन्साल्वीस नाम से परिचित हो गया।

और सबसे छोटा एक मुसलमान परिवार में अकबर नामसे परिचित हुआ।

जेनी, राॅबर्ट की बेटी किशनलाल ने अपहरण करके उसकी परवरिश करके उसकी पढ़ाईके लिए लन्दन भेजता है और वह वापस आती है।

एन्थनी को जेनी से प्यार हो जाता है।

अकबर अब एक मशहुर कवाल बन गया था, उसे तैय्यब अली की बेटी सलमा से प्यार हो जाता है।

अमर एक इमानदार पुलिस अफसर, एक लड़की जो पाकिटमार थी उसे नर्क की जिन्दगी से छुड़ाकर एक शरीफ जिन्दगी जीना सिखाता है।

तिनो भाई मिलते रहते हैं पर उन्हे एक दूसरे की पहचान नहीं होती।

राबर्ट, अपनी बेटी जेनी के लिए जिसे किशनलाल बचपन में ही उठा ले गया था, मिलने के लिए तड़पता रहता है उसे वह हर जगह तलाश करता रहता है।

जब जेनी उसे मिल जाती, तब वह परिस्थिती वश अपनी बेटी का हाथ अपने पार्टनर जिविस्को के हाथमें देने के लिए मजबूर हो जाता है।

इधर पादरी के हत्या के घटना में एन्थनी अपने बाप किशनलाल को पहचानता है।

फूल बेचकर जीवन गुजारनेवाली किशनलाल की पत्नी अपने बेटे अकबर को पहचानती है।

और किशनलाल अपनी पुरानी झोपड़ी के पास अपना बेटा अमर को पहचान लेता है।

इधर जेनी की शादी में अमर, अकबर, एन्थनी, वैष बदलकर आते है और सारी राबर्ट के गेंग की पिटाई करके उन्हें पुलिस स्टेशन में पहुँचाते है। किशनलाल भी अपनी सजा पूरी करके अपने बेटों और पत्नी सभी से मिल जाता है।

(From the official press booklet)